दिल में बहुत कुछ है कहने को..

मेरा दिल तुझसे कुछ कहना चाहता है .....

होंट है सिले सिले ....
पर दिल में इक उफ़ान है..
मैं ना कुछ कह पा रहा, तुम भी चुप हो...
मगर अन्दर हलचल मचाये ,ये इश्क़ बड़ा बेइमान है...
कहने को तो मैं जिगरा शेर हूँ...
पर ना जाने तेरे सामने क्युन कापते जुबान है...
होंट है सिले सिले ..
पर दिल में उफ़ान है..
आँखो आँखो से ही क्यों ना तुम, मेरे लब्ज को पहचानती हो ...
मैं हूँ तेरा, तुम हो मेरी, ये बातें क्युन ना जानती हो
क्या इश्क़ के दिदार को लफ़्जो की दरकार है..
होंट है सिले सिले..
पर दिल में उफ़ान है..
ये मैं जानता हूँ, की तुझसे ना मैं कह पाउंगा .
खुद के जज्बातो को अंदर ही अन्दर दफ़नाउंगा..
पर क्या तुम मुझको नहीं पहचानती हो ..
मेरे दिल में तेरे लिये क्या है, क्या तुम सच में नहीं जानती हो ..
कह भी दो अब की मैं जान चुकी हूँ,
तुझको ही बस अपना मान चुकी हूँ,...
फ़िर क्यों लफ़्जो पर इतबार करे हम..
चल आ आँखो ही आँखो से प्यार करे हम..
हम मुहब्बत की ऐसी इबादत लिखेंगे...
जो कोई ना लिख पाया, ऐसी आयत लिखेंगे..
ऐसा अफ़साना, की याद करे जमाना..
हम मुहब्बत ऐसा यार करेंगे
होंट है सिले सिले..
पर दिल में उफ़ान है...


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