मेरे महबूब हो तुम

श्रद्घा तुझमे सिन्हेश्वर धाम की..
रसगुल्ला शिव आदर्श की हो तुम
गुरूड़ तुझमे साहुगढ सी..
कॉलेज चौक की शाम हो तुम
शोर तुझमे कर्पूरी चौक सा...
सुभाष चौक की जाम हो तुम
चाय तुम थाना चौक की...
मस्जिद चौक की खुमार हो तुम
तुम आशीष महादेव की...
दुर्गा जैसी स्वाभिमान हो तुम
सादगी तुझमे पुरानी बाजार सी...
प्रेम की मल्हाड़ हो तुम
आकर्षण तुझमे कृष्ण की बाँसुरी सी ...
जीवन की पतवार हो तुम
तुम सरस मखमल जैसी..
साँसो की रफ्तार हो तुम


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